नाटक : बोझ (भाषा - हिन्दी/मैथिली/अँग्रेजी) प्रथम प्रस्तुति

 नाटक :  बोझ 

(भाषा - हिन्दी/मैथिली/अँग्रेजी)

प्रथम प्रस्तुति : 21 अगस्त 2022, यूनिकोर्न एक्टर्स स्टुडियो, 227, मेन मार्केट, पटपरगंज, मयूर विहार-1, दिल्ली 110092  


समाज में व्याप्त अनेकों परंपरा आज भी ऐसी है जिसका प्रतिफल मानसिक कुंठा के रूप में सामने आता है। जीवन में कई सारी अनपेक्षित घटनाएँ घाट जाती है परंतु व्यक्ति के मन में उससे कुंठाएँ जन्म लेने लगती है, जो उम्र भर कचोटती है। इस नाटक में एक संभ्रांत युवक अपने ऐसे ही कुंठा के कारण मुसीबत में फंस जाता है और डरता चला जाता है। नाटक का मूल तत्व कुंठा ही है। बेमेल विवाह, बाल विवाह आदि से लड़कियों में उपजी कुंठा जब अति हो जाती है तो वह उन्माद का रूप लेती है। केन्द्रीय पात्र फागुनी का जन्म ही विवादित है जिससे शंकित होकर उसके पिता बचपन में ही उसकी शादी करबा  देता है और कुछ समय बाद वह बिधबा हो जाती है। नतीजन उसकी मानसिक उम्र अचानक से अधिक हो जाने के कारण उसमें कुंठा उत्पन्न होना और फिर कुंठा से उत्पन्न उन्माद का पागलपन के हद तक बढ़ जाना। फिर अकस्मात परिस्थितिवश घटी घटना से उसका नायक के साथ शारीरिक संबंध बनने से पागलपन का ठीक हो जाना आदि घटित होता है। इस घटना से अपराध बोध और आत्मग्लानी से ग्रस्त नाटक का नायक खुद कुंठित हो जाता है। परंतु जब उसे इस अनचाहे घटना के प्रतिफल में हुए सुखद परिणाम की जानकारी मिलती तब उसे अनचाहे बोझ से मुक्ति मिलती है। नाटक की पृष्ठभूमि मिथिला के मधुबनी ज़िले का है। मिथिला के सामाजिक-सांस्कृतिक झलक को नाटकीय तत्व के रूप में दर्शाया गया है। 

अभिनय : काश्यप कमल

प्रस्तुति नियंत्रन व वस्त्र सज्जा : सुनीता झा

संगीत संचालन : वैशाली झा

सहयोग : यदुवीर भारती, नीरज कुंदेर, अभिषेक देवनारायन, सुप्रीता वत्सयायन, कविता झा, सुभाष कुमार, बजरंग मण्डल, श्यामा चरण झा, मुकेश झा मिक्कू’, कल्पना मिश्र, अपर्णा झा, सर्वप्रिया व शांभवी 

लेखन : काश्यप कमल

निर्देशन: शिवा कुंदेर

प्रस्तुति : अछिञ्जल 


 


















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